देहरादून। सहस्रधारा रोड स्थित एटीएस कालोनी में लंबे समय से दहशत और दबंगई का पर्याय बने विवादित बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर जिला प्रशासन ने मंगलवार को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की।जिलाधिकारी सविन बंसल की अदालत ने एक तरफ उसे उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत छह माह के लिए जिला बदर कर दिया, वहीं दूसरी ओर बच्चों पर पिस्टल लहराने के मामले में उसका शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त कर दिया। प्रशासन ने आरोपित की 32 बोर पिस्टल जब्त करते हुए पुलिस अभिरक्षा में रखने के आदेश भी जारी किए हैं।
जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने साफ कहा कि आरोपित का व्यवहार क्षेत्र में भय, असुरक्षा व अशांति का माहौल पैदा कर रहा था। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की जाती तो कोई गंभीर घटना हो सकती थी। आदेश के तहत पुनीत अग्रवाल अगले छह महीने तक बिना अनुमति देहरादून की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर कारावास एवं जुर्माने की चेतावनी भी दी गई है। बता दें कि, कार्रवाई की शुरुआत एटीएस कालोनी निवासी डीआरडीओ विज्ञानी हेम शिखा समेत अन्य निवासियों की शिकायत से हुई।आरोप था कि गत 13 अप्रैल को बिल्डर ने डीआरडीओ से जुड़े परिवार पर हमला कर मारपीट की, जिसमें पीड़ित का कान का पर्दा तक फट गया। महिलाओं और बुजुर्गों के साथ भी अभद्रता की गई। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने आरोपित के खिलाफ गुंडा एक्ट लगाने की मांग की थी।
डीएम कोर्ट ने मामले में एसडीएम मसूरी से गोपनीय जांच कराई। जांच में सामने आया कि आरोपित के विरुद्ध पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और उसका व्यवहार लगातार भय का माहौल बना रहा था। पुलिस की एफआइआर, प्रसारित वीडियो, स्थानीय लोगों की शिकायतें और डीआरडीओ निदेशक मनोज कुमार ढाका की ओर से दी गई शिकायत को भी अदालत ने गंभीरता से लिया।
प्रशासनिक रिकार्ड के अनुसार, आरोपित अग्रवाल के खिलाफ डीआरडीओ विज्ञानी से मारपीट, आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों को धमकाने, नशे में उत्पात मचाने, बच्चों पर पिस्टल तानने, गाली-गलौच, वाहन से टक्कर मारने के प्रयास और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर मामलों में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत पांच मुकदमे दर्ज हैं।
इसी बीच वर्ष 2025 में दीपावली पर एटीएस कालोनी में बच्चों पर लाइसेंसी पिस्टल लहराने का मामला भी जिला प्रशासन तक पहुंचा था। डीएम ने तब स्वतः संज्ञान लेते हुए पहले लाइसेंस निलंबित किया था। अब विस्तृत सुनवाई व पुलिस रिपोर्ट के बाद शस्त्र लाइसेंस पूरी तरह निरस्त कर दिया गया। अदालत ने माना कि आरोपित भविष्य में भी शस्त्र का दुरुपयोग कर सकता है, इसलिए हथियार उसके पास रखना लोकशांति के लिए खतरा है।

