मंत्रियों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल !

लाहौर/इस्लामाबाद. ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध की आग अब पाकिस्तान के चूल्हे तक पहुंच गई है. खाड़ी क्षेत्र में तनाव और तेल की सप्लाई ठप होने से पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल का हाहाकार मच गया है. हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि पाकिस्तान सरकार ने मंत्रियों और सरकारी बाबुओं पर ऐसी पाबंदियां लगा दी हैं, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी.मंत्री अब सैलरी नहीं लेंगे, सांसदों की सैलरी में 50% की कटौती कर दी गई है. सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल आधा कर द‍िया गया है. स्‍कूल कॉलेज बंद कर द‍िए गए हैं.

देश के नाम संबोधन में पाक‍िस्‍तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कई सख्त फैसलों का ऐलान क‍िया . उन्‍होंने कहा, अगले दो महीनों तक सरकारी वाहनों के लिए मिलने वाला ईंधन भत्ता 50% कम कर दिया जाएगा और सरकारी विभागों की 60% गाड़ियां बंद रखी जाएंगी. हालांकि एंबुलेंस और पब्लिक बसों को इससे बाहर रखा गया है.
प्रधानमंत्री ने कहा, दो महीनों तक सरकार के मंत्री अपनी सैलरी नहीं लेगी, जबकि सांसदों की सैलरी में 50% कटौती की जाएगी. इसके अलावा 3 लाख रुपये से ज्यादा वेतन पाने वाले बीएस-20 अधिकारियों की दो दिन की सैलरी जनता के लिए इस्तेमाल की जाएगी.

ईंधन बचाने के लिए सरकारी और निजी दफ्तरों में 50% कर्मचारी वर्क-फ्रॉम-होम करेंगे और दफ्तर हफ्ते में केवल चार दिन खुलेंगे. स्कूलों में भी दो दिन की छुट्टी होगी और उच्च शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन क्लासेस शुरू की जाएंगी.
इससे पहले पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ ने भी ऐसी पाबंद‍ियां लगाने का ऐलान क‍िया था. मरियम नवाज ने साफ कर दिया है कि जब तक यह पेट्रोलियम संकट खत्म नहीं होता, तब तक राज्‍य सरकार के मंत्रियों को पेट्रोल-डीजल नहीं द‍िया जाएगा. यानी अब मंत्रियों को अपनी जेब से तेल डलवाना होगा या गाड़ियों को गैरेज में खड़ा करना होगा.

इतना ही नहीं, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चलने वाले ‘प्रोटोकॉल वाहनों’ पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. अब कोई भी मंत्री लंबी-चौड़ी गाड़ियों के काफिले के साथ नहीं घूम सकेगा. सुरक्षा के नाम पर केवल एक गाड़ी ले जाने की अनुमति दी गई है. सरकारी अफसरों के लिए पेट्रोल और डीजल भत्ते में तत्काल प्रभाव से 50% की कटौती कर दी गई है.तेल की एक-एक बूंद बचाने के लिए पाकिस्तान ने अब डिजिटल सहारा लिया है. मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि पूरे पंजाब में 10 मार्च से 31 मार्च तक सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद रहेंगे. हालांकि, परीक्षाएं तय शेड्यूल के अनुसार होंगी, लेकिन पढ़ाई के लिए ऑनलाइन क्लास का विकल्प दिया गया है.

सरकारी दफ्तरों में भी ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ नीति लागू कर दी गई है. केवल वही कर्मचारी दफ्तर आएंगे जिनके बिना काम रुक सकता है. निजी कंपनियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दें और दफ्तर में भीड़ कम करें.पाकिस्तान के मशहूर ‘हॉर्स एंड कैटल शो’ समेत सरकार के सभी आउटडोर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है. मरियम नवाज़ ने जनता से भी अपील की है कि वे देर रात तक होने वाली शॉपिंग और गैर-जरूरी बाहरी कार्यक्रमों से बचें. बाजार जल्दी बंद करने और बिजली-ईंधन बचाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं.

पेट्रोल की किल्लत के बीच ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी को रोकने के लिए पंजाब सरकार ने ‘जिला पेट्रोलियम निगरानी समितियां’ बनाई हैं. पंजाब सूचना प्रौद्योगिकी बोर्ड (PITB) को पेट्रोलियम उत्पादों के लिए एक हाई-टेक ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ सिस्टम बनाने का जिम्मा सौंपा गया है. इसके जरिए पुलिस और प्रशासन यह नजर रखेगा कि पेट्रोल पंपों पर आने वाला तेल कहां जा रहा है और कोई इसे ऊंचे दामों पर तो नहीं बेच रहा. ट्रांसपोर्ट के किराए पर भी सख्त नजर रखी जा रही है ताकि तेल की कमी का बहाना बनाकर बस और ट्रक मालिक आम जनता को न लूटें.

इस संकट की घड़ी में मरियम नवाज़ ने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर के नेतृत्व की तारीफ की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक बहादुर राष्ट्र है और एकता व धैर्य के साथ इस कठिन समय से बाहर निकल आएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान युद्ध लंबा खिंचता है और होर्मुज की खाड़ी बंद रहती है, तो पाकिस्तान में स्थिति और भी भयावह हो सकती है. फिलहाल, मरियम नवाज़ के इन “असाधारण फैसलों” को पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाने की आखिरी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

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