बेंगलुरु: बेंगलुरु के पीजी में रहने वाले हजारों स्टूडेंट्स और कर्मचारियों को एलपीजी क्राइसिस के दौर में नई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अगर एलपीजी सप्लाई धड़ाधड़ नहीं हुई तो पीजी में रहने वालों को फरमाइश के हिसाब से खाना, लंच-डिनर में वैरायटी वाली डिशेज, आधी रात में गर्म पानी भी नहीं मिलेगा। मंगलवार को पीजी ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने एलपीजी संकट को देखते हुए एक अर्जेंट मीटिंग बुलाई।
पीजी ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अरुण कुमार डीटी ने बताया कि बेंगलुरु में हजारों प्रोफेशनल और स्टूडेंट पेइंग गेस्ट में रहते हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी खाने के लिए होटलों पर निर्भर हैं। उन्होंने आगे बताया कि शटडाउन के कारण उन्हें अपना गुजारा खुद करना होगा।
कुछ पीजी ऑपरेटर्स ने गैस बचाने को लेकर कहा कि वे लोगों को शेयर्ड किचन में अकेले खाना बनाने से रोकने पर विचार कर रहे हैं। पीजी मालिकों का कहना है कि इससे फ्यूल की खपत ज्यादा होती है। पीजी ऑपरेटर्स हर दिन बनने वाले डिशेज की वैरायटी को कम करने और मल्टी-आइटम मेन्यू को आसान खाने से बदलने पर भी चर्चा कर रहे हैं, जिसमें कम समय में खाना पकाया जा सके। एक और प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है कि अगर यह कमी बनी रहती है तो रोजाना परोसे जाने वाले खाने की संख्या तीन से घटाकर दो कर दी जाए।
यह स्थिति बृहत बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन की चेतावनी के बीच आई है। उन्होंने कहा कि कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई अचानक रुकने की वजह से मंगलवार से हजारों होटल बंद हो सकते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि यह घटनाक्रम तेल कंपनियों के पहले के उस भरोसे के खिलाफ है जिसमें उन्होंने कहा था कि सप्लाई कम से कम 70 दिनों तक बिना रुके जारी रहेगी।
अगर होटल अपना काम बंद कर देते हैं, तो इसका असर पीजी होटलों में रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है। क्योंकि कई लोग अपने घरों में मिलने वाले खाने के अलावा आस-पास के रेस्टोरेंट पर भी निर्भर रहते हैं।बेंगलुरु में करीब 15,000 पीजी हैं, जिनमें 10 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। इनमें शहर में काम करने वाले प्रोफेशनल और ब्लू-कॉलर वर्कर शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर जगहें लोगों को दिन में तीन बार खाना देती हैं।
