नई दिल्ली। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी से शनिवार की रात आई एक खबर ने पूरी दुनिया को हिला दिया। मीडिया, सत्ता और ग्लैमर का सबसे बड़ा मंच माने जाने वाले व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान अचानक गोलियों की आवाज गूंज उठी।कुछ ही पलों में जश्न का माहौल खौफ में बदल गया। हालात ऐसे बने कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को कार्यक्रम के बीच से तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा। उनके साथ फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी तत्काल बाहर निकाला गया।
जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम पूरे शबाब पर था। हॉल में देश-विदेश के बड़े पत्रकार, राजनेता और सेलिब्रिटी मौजूद थे। तभी अचानक तेज आवाजें सुनाई दीं, पहले एक और फिर कई। कुछ सेकंड के लिए लोगों को लगा कि यह मजाक या कोई तकनीकी खराबी है, लेकिन जल्दी ही साफ हो गया कि यह गोलीबारी है।गोली की आवाज सुनते ही हॉल के अंदर अफरा-तफरी मच गई। सैकड़ों लोग अपनी जान बचाने के लिए टेबल के नीचे छिप गए। कुछ लोग जमीन पर लेट गए, तो कई बाहर की ओर भागे। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत पूरे इलाके को घेर लिया और हालात को काबू में लेने की कोशिश शुरू कर दी।
गोलियों की आवाज सुनते ही अमेरिकी सीक्रेट सर्विस हरकत में आ गई। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप, फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को तुरंत कार्यक्रम स्थल से बाहर निकालकर सुरक्षित जगह ले जाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें किसी तरह की चोट नहीं आई। घटना के बाद उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ करते हुए कहा कि “उन्होंने बहुत तेजी और बहादुरी से काम किया।”इस घटना के दौरान मौके पर मौजूद पत्रकारों ने जो देखा, वह बेहद डरावना था। सीएनएन के वरिष्ठ एंकर वुल्फ ब्लिट्जर ने बताया कि जब गोलीबारी हुई, तब वह हमलावर से कुछ ही फीट की दूरी पर थे।
उनके मुताबिक, “सब कुछ बेहद तेजी से हुआ। अचानक गोलियों की आवाज आई और लोगों को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है।संदिग्ध व्यक्ति किसको निशाना बनाना चाहता था, यह समझना मुश्किल था। वह बस गोली चला रहा था।” ब्लिट्जर के इस बयान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमलावर कितना करीब तक पहुंच चुका था और स्थिति कितनी गंभीर हो सकती थी।घटना के बाद एक महिला पत्रकार ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, सुरक्षा जांच के दौरान पास की जांच पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा था। जबकि पूरी तरह से हथियारों की तलाशी पर उतना फोकस नहीं था।
उनके मुताबिक, “संभव है कि इसी वजह से हमलावर अंदर तक पहुंच गया।” उन्होंने आगे कहा कि, “जब वे कार्यक्रम के लिए अंदर गए तो उनसे सबसे पहले पास मांगा गया। उनकी पहचान को लेकर किसी भी सुरक्षा अधिकारी ने कुछ नहीं मांगा। उनसे न तो पहचान पत्र मांगा गया और न ही प्रेस से संबंधित कोई पहचान।” यह बयान सामने आने के बाद अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
घटना के बाद की गई शुरुआती जांच में सामने आया है कि, हमलावर अकेला था और उसके पास कई हथियार थे। जिसमें शॉटगन, हैंडगन और चाकू शामिल थे। बताया जा रहा है कि वह सुरक्षा घेरा तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था और इसी दौरान उसने फायरिंग की। इसके कारण एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी को गोली लग गई, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से उसकी जान बच गई। हालांकि, सुरक्षा बलों ने कुछ ही मिनटों में हमलावर को काबू कर लिया और हिरासत में ले लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।
इस हमले के बाद एक और चौंकाने वाला खुलासा यह सामने आया है कि, आरोपी कोल टॉमस पेशे से एक शिक्षक रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह कैलिफोर्निया का रहने वाला है और पहले एक स्कूल में पढ़ाता था। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उसने इस हमले को अंजाम क्यों दिया।
जांच एजेंसियां अब उसके बैकग्राउंड, मानसिक स्थिति और संभावित मकसद की गहराई से जांच कर रही हैं। हालांकि, जांच एजेंसियां का कहना है कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। इसके कारण वह किसी भी एजेंसी के रडार पर नहीं था।
घटना के बाद पूरे कार्यक्रम को बीच में ही रोक दिया गया। आयोजकों ने साफ कहा कि, सुरक्षा को देखते हुए डिनर को फिलहाल रद किया जा रहा है। हालांकि, बाद में इसे दोबारा आयोजित करने की बात कही गई है। ट्रंप ने भी संकेत दिया कि कार्यक्रम को फिर से आयोजित किया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि, क्या यह हमला सीधे राष्ट्रपति ट्रंप को निशाना बनाकर किया गया था? इस सवाल पर ट्रंप ने खुद कहा, शायद वह ही इसका निशाना थे। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है। एफबीआई इस पूरे मामले की जांच कर रही है और हर एंगल से पड़ताल की जा रही है, जिसमें आतंकी एंगल भी शामिल है।
अमेरिका जैसे देश में, जहां राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और देश के शीर्ष पत्रकार एक साथ मौजूद हों, वहां इस तरह की घटना होना बेहद गंभीर माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद हमलावर हथियार लेकर अंदर तक कैसे पहुंच गया। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा अलर्ट है।

