रुद्रपुर: ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा क्षेत्र के ग्राम दरऊ से सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है. गांव की महिला प्रधान नाज़िया बी के 13 दिसंबर से जेल में बंद होने के बावजूद उनके पति द्वारा सरकारी डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) का इस्तेमाल कर लाखों रुपये सरकारी खाते से निकाले जाने का आरोप लगा है.
बीजेपी नेता अब्दुल गफ्फार की बीवी ने जीता था ग्राम प्रधान का चुनाव: इस पूरे मामले का खुलासा किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने प्रेसवार्ता में किया है. जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है. ये मामला ऊधम सिंह नगर के किच्छा क्षेत्र के ग्राम दरऊ का है. जुलाई 2025 में हुए पंचायत चुनाव में ग्राम दरऊ से भाजपा नेता अब्दुल गफ्फार की बीवी नाज़िया बी ने ग्राम प्रधान का चुनाव जीता था.ग्राम प्रधान नाजिया बी तीन मुकदमों थीं वांछित, अब पौड़ी जेल में हैं बंद: आरोप है कि चुनाव लड़ने के समय नाज़िया बी कोटद्वार में दर्ज तीन मुकदमों में वांछित थीं और पुलिस उनकी तलाश कर रही थी. बाद में 13 दिसंबर को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और तब से नाजिया बी पौड़ी जेल में बंद हैं.
कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ ने किया बड़ा खुलासा: किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने रुद्रपुर स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में बड़ा खुलासा किया. उनके अनुसार, जेल में बंद होने के बावजूद नाज़िया बी का डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) फ्रीज नहीं किया गया.जेल में बंद ग्राम प्रधान नाजिया बी के सरकारी खाते से ट्रांसफर हुए 10 लाख से ज्यादा रुपए: बताया गया कि प्रधान ने एक पत्र जारी कर अपने पैर में फ्रैक्चर होने का हवाला देते हुए अपने पति अब्दुल गफ्फार को प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया. विधायक का आरोप है कि इसी आधार पर अब्दुल गफ्फार ने विकासखंड के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर डीएससी का दुरुपयोग किया और सरकारी खाते से कुल 10 लाख 39 हजार रुपये निकाल लिए.
विधायक ने नाजिया बी के शौहर और दोषी अफसरों पर की कार्रवाई की मांग: कांग्रेस विधायक ने कहा कि-जब प्रधान जेल में थीं, तब नियमानुसार उनकी डीएससी तत्काल प्रभाव से निलंबित या फ्रीज की जानी चाहिए थी. लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिससे सरकारी धन की निकासी संभव हो सकी. हमने नितिन सिंह भदौरिया (जिलाधिकारी) से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और तीन दिन के भीतर ग्राम प्रधान के पति एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है.विधायक बेहड़ ने दी अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे डीएम कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे.
यह मामला न केवल पंचायत स्तर पर पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि डिजिटल प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न उठा रहा है. यदि ग्राम प्रधान जेल में थीं, तो उनकी डीएससी सक्रिय कैसे रही? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही थी या मिलीभगत. अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं. यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला पंचायत स्तर पर सरकारी धन के दुरुपयोग का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है.उधर कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ की डीएम कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी भी प्रशासन को जल्दी जांच पूरी कर कानूनी कार्रवाई करने को मजबूर करेगी.
