नई दिल्लीः ईरान जंग का क्या होगा? क्या दुनिया एक बड़े विनाशकारी युद्ध की ओर बढ़ रही है या शांति का कोई रास्ता निकलेगा? व्हाइट हाउस में गहरी खामोशी छाई हुई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कोई बड़ा बयान नहीं दिया है और उनका पूरा दिन बंद कमरों में होने वाली मीटिंग में बीत रहा है. बेचैनी बढ़ रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई जवाब नहीं मिल रहा है. ट्रंप एक ओर कह रहे कि ईरान के साथ शुक्रवार तक डील हो जाएगी. दूसरी ओर पर्दे के पीछे जंग की तैयारी भी चल रही है. उधर ईरान झुकने को तैयार नहीं है.
ईरान संकट के बीच व्हाइट हाउस में एक अजीब सी खामोशी है. बुधवार को पूरे दिन ट्रंप कैमरे के सामने नहीं आए. व्हाइट हाउस के लॉन में पत्रकार मौजूद थे, ताकि उनसे बात कर सकें. लेकिन अचानक एक सिक्योरिटी अलर्ट जारी हुआ और सारे पत्रकारों को तुरंत वहां से हटा दिया गया. वजह क्या थी, वो नहीं बताई गई. लेकिन यह घटना दिखाती है कि वाशिंगटन में सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट है.
अमेरिकी मीडिया का कहना है कि आमतौर पर ऐसे मौकों पर सूत्रों से जानकारी मिल जाती थी. लेकिन इस वक्त कोई कुछ खुलकर बोलने को तैयार नहीं है. कई बार कुछ जानकारी आती है, अगले ही पल उसे खारिज करने वाली जानकारी आ जाती है. यानी फैक्ट नहीं मिल रहा है. पत्रकार अफसरों को फोन कर रहे हैं, लेकिन कोई भी बात करने को तैयार नहीं.न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ दूसरे दौर की शांति वार्ता शुक्रवार से शुरू हो सकती है. अहम बात यह है कि इस बार पाकिस्तानी अधिकारी इस बातचीत में अहम भूमिका निभा रहे हैं और बातचीत अगले 36 से 72 घंटों में हो सकती है. ट्रंप ने इसे संभव बताया है.
बुधवार शाम को खत्म होने वाला सीजफायर अब आगे बढ़ा दिया गया है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह विस्तार इसलिए किया गया है ताकि ईरानी सरकार को युद्ध समाप्त करने के लिए एक ठोस प्रस्ताव पेश करने का पर्याप्त समय मिल सके. हालांकि, यह शांति से ज्यादा कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति लग रही है.ईरानी वार्ताकार गालिबाफ ने अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि जो लक्ष्य वे सैन्य आक्रामकता से हासिल नहीं कर सके, वे दादागिरी से भी हासिल नहीं कर पाएंगे. ईरान का स्पष्ट रुख है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब ईरानी लोगों के अधिकारों को मान्यता दी जाएगी.
शांति वार्ता के दावों के बीच होर्मुज में तनाव चरम पर है. आज सुबह ईरान ने दावा किया कि उसने होर्मुज में दो मालवाहक जहाजों को कब्जे में ले लिया है. इन दोनों जहाजों को हमलों से नुकसान पहुंचने की भी खबर है. यह ईरान की तरफ से अमेरिका पर सीधा दबाव बनाने की कोशिश है.होर्मुज में एक तीसरे मालवाहक जहाज यूफोरिया पर भी हमला किया गया है. यह जहाज यूएई का है. मरीन ट्रैफिक डेटा के अनुसार, ईरान के पश्चिम में हुए इस हमले के बाद जहाज को यूएई के खोर फक्कन बंदरगाह के पास लंगर डालना पड़ा. हालांकि जहाज और चालक दल सुरक्षित हैं, लेकिन यह घटना दिखाती है कि समंदर में व्यापारिक रास्ते अब भी बेहद असुरक्षित हैं.
अमेरिका ईरान के किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करते हुए 5000 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात करने का फैसला किया है. यह तैनाती दिखाती है कि अमेरिका बातचीत फेल होने की स्थिति में सैन्य विकल्प के लिए पूरी तरह मुस्तैद है.ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के खतरे को देखते हुए, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सुरक्षा अभेद्य करने के लिए अत्याधुनिक THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिया है. यह सिस्टम आसमान में ही दुश्मन की मिसाइलों को तबाह करने में सक्षम है.
होर्मुज वैश्विक तेल व्यापार की रीढ़ है. ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने साफ कर दिया है कि जब तक सीजफायर का उल्लंघन बंद नहीं होता, होर्मुज को दोबारा नहीं खोला जाएगा. ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करके वैश्विक अर्थव्यवस्था को ‘बंधक’ बना रहा है.

