मुखौटा नृत्य कर 18 तालों में किया रामायण का वर्णन

चमोली।   सलूड़ डुंगरा गांव में रविवार को विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण का आयोजन किया गया। इस दौरान संपूर्ण रामायण का वर्णन 18 तालों में किया गया। रम्माण के दौरान देवताओं के मुखौटा नृत्य ने सभी को रोमांचित कर दिया। वहीं जागर में रामायण के गायन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विश्व प्रसिद्ध रम्माण का आयोजन हर साल बैसाख माह में होता है। रविवार को सलूड़-डुंगरा गांव के भूमियाल देवता के मंदिर प्रांगण में रम्माण मेले का आयोजन हुआ। रम्माण में जागर शैली में राम कथा का वर्णन किया गया और राम, लक्ष्मण, सीता व हनुमान के पात्रों ने इसमें अभिनय किया।

संपूर्ण रामायण का वर्णन 18 तालों में किया गया। इसमें राम जन्म, सीता हरण, हनुमान मिलन, लंका दहन जैसी घटनाओं का वर्णन किया गया। रम्माण के बीच दर्शकों के मनोरंजन के लिए अलग-अलग मुखौटा नृत्य हुआ। इसमें म्वर-म्वारी, बणियां-बणियांण के बाद भूमियाल देवता का नृत्य हुआ। कुरुजोगी नृत्य के बाद स्वर्ण मृग वध सहित विभिन्न मुखौटा नृत्य हुए। अंत में सबसे रोमांचित करने वाला मल्ल नृत्य हुआ। मल्ल योद्धा प्रांगण में पहुंचे और ढोल दमाऊं की थाप पर ध्वनि की गर्जना के साथ प्रतीकात्मक युद्ध हुआ। अंत में भूमियाल देवता के अवतारी पुरुष ने भक्तों को खुशहाली का आशीर्वाद दिया।

मेले में पहुंचे बदीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने रम्माण मेले के लिए तीन लाख और ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी ने ढाई लाख रुपये देने की घोषणा की। रम्माण में जिलाधिकारी गौरव कुमार और एसपी सुरजीत सिंह पंवार भी पहुंचे थे। इस दौरान विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण के संयोजक डॉ. कुशल सिंह भंडारी, अध्यक्ष शरत सिंह बंगारी, सचिव विकेश कुंवर, भरत सिंह पंवार, रणवीर सिंह चौहान, दर्जाधारी हरक सिंह नेगी, नगर पालिका ज्योतिर्मठ अध्यक्ष देवेश्वरी शाह, भाजपा मंडल अध्यक्ष गुड्डू लाल आदि मौजूद रहे।

सलूड़ डुंगरा में रविवार को विश्व धरोहर रम्माण का आयोजन हुआ। इसमें अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि भी पहुंचे लेकिन यहां जाने के लिए जो सड़क बनी है उसने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी। कच्ची सड़क पर उड़ता धूल का गुबार, सड़क किनारे पड़े पत्थर बयां कर रहे थे कि विभाग और जनप्रतिनिधि इस क्षेत्र को लेकर कितने संजीदा हैं। सलूड़ डुंगरा के लिए बदरीनाथ हाईवे पर झड़कुला से सड़क जाती है लेकिन स्थिति यह है कि सड़क पर अभी तक डामरीकरण नहीं किया गया है। कई वर्षों से पीएमजीएसवाई की ओर से इस सड़क का चौड़ीकरण व डामरीकरण का कार्य प्रस्तावित है।

इस कारण सड़क किनारे पत्थरों के ढेर लगे हैं। रविवार को रम्माण के आयोजन में शामिल होने के लिए जिलाधिकारी से लेकर विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि इसी सड़क से सलूड़ डुंगरा पहुंचे और सभी के वाहन धूल से सने हुए थे। कई जगह सड़क किनारे पत्थरों के ढेर लगे होने से वाहनों की आवाजाही में दिक्कत आई। इस सड़क की यह स्थिति कई वर्षों से ऐसी ही बनी है। स्थानीय भरत सिंह कुंवर का कहना है कि इस सड़क के लिए कई बाद आंदोलन किए गए लेकिन आज भी यहां लोग परेशानी उठाकर आवाजाही करते हैं। प्रशासन को इसका संज्ञान लेना चाहिए।

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