नई दिल्ली: पाकिस्तान ने पहले सऊदी अरब के साथ रणनीतिक डिफेंस डील किया। अब वह कतर और तुर्की के साथ मिलकर एक प्रस्तावित ‘इस्लामिक NATO’ की प्लानिंग को आगे बढ़ाने में जुटा है। इसका मकसद ऐसा क्षेत्रीय डिफेंस गुट बनाना है, जिससे बाहरी ताकतों पर निर्भरता कम हो सके। अगर यह योजना साकार होती है, तो इससे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था का स्वरूप बदल सकता है। एक्सपर्ट की मानें तो भारत के लिए नई रणनीतिक चिंताएं खड़ी हो सकती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें पाकिस्तान का रोल बेहद अहम है, वह केंद्रीय भूमिका में नजर आ रहा।
‘इस्लामिक नाटो’ पर पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने सनसनीखेज दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि ये पश्चिमी इंटेलिजेंस का रचा गया एक साइलेंट वॉरफेयर है ताकि भारत को उलझा कर रखा जा सके। लकी बिष्ट ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, ‘इस्लामिक नाटो’ (IMCTC) को लेकर एक बहुत बड़ा सच दुनिया से छिपाया जा रहा है। तुर्की 2015 से ही इसका सदस्य है, लेकिन असली और खतरनाक खेल अब शुरू हुआ है।’
पूर्व रॉ एजेंट, स्नाइपर और कमांडो लकी बिष्ट ने आगे कहा कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए नए ‘डीप डिफेंस पैक्ट’ (पक्के रक्षा समझौते) में अब तुर्की और कतर भी एक सीक्रेट कोर टीम के रूप में जुड़ रहे हैं। समीकरण बिल्कुल साफ है सऊदी और कतर की असीमित फंडिंग + तुर्की की ‘नाटो-ग्रेड’ तकनीक और ड्रोन + पाकिस्तानी फौज का ग्राउंड नेटवर्क।
लकी बिष्ट ने कहा कि इस पूरे ‘प्रॉक्सी-नाटो’ ढांचे के पीछे सीधे तौर पर CIA और MI6 का हाथ है। पश्चिमी देश अब पाकिस्तान को सीधे हथियार नहीं दे सकते, इसलिए उन्होंने तुर्की (जो खुद नाटो मेंबर है) और अरब देशों को मोहरा बनाकर भारत के खिलाफ यह ‘बैकडोर’ तैयार किया है। यह सिर्फ इस्लामिक देशों का गुट नहीं है, बल्कि पश्चिमी इंटेलिजेंस का रचा गया एक साइलेंट वॉरफेयर है ताकि भारत को उलझा कर रखा जा सके।

