नई दिल्लीः दुनिया अभी हंतावायरस के प्रकोप से जूझ ही रही थी कि अब इबोला वायरस का बड़ा प्रकोप फिर से सामने आ गया है. एक समाचार एजेंसी के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला के एक नए प्रकोप के कारण 80 लोगों की मौत हो गई है, यह जानकारी देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को देर रात दी है.अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) के अनुसार, इस बीमारी की पहचान युगांडा बॉर्डर के पास स्थित दूरदराज के इतूरी प्रांत में हुई है, जहां अधिकारियों ने 246 संदिग्ध मामलों को दर्ज किया है. एजेंसी ने शुक्रवार को बताया कि ज्यादातर मामले और मौतें मोंगवालू, रवाम्पारा और बुनिया हेल्थ जोन में हुई हैं.
सरकार ने कहा कि उसने अपने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर को एक्टिवेट कर दिया है, एपिडेमियोलॉजिकल और लैबोरेटरी सर्विलांस को मजबूत किया है, और रिस्पॉन्स टीमों को तेजी से तैनात करने का आदेश दिया है. इबोला वायरस शरीर के तरल पदार्थों (जिनमें खून, उल्टी और वीर्य शामिल हैं) के जरिए फैलता है, और इससे गंभीर और अक्सर जानलेवा बीमारी हो सकती है. Africa CDC ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि यह प्रकोप पड़ोसी देशों युगांडा और दक्षिण सूडान के काफी करीब है.
अफ्रीका CDC माइनिंग से जुड़ी गतिविधियों और बुनिया और रवाम्पारा जैसे प्रभावित इलाकों में लोगों की भारी आवाजाही की वजह से बीमारी के और फैलने के खतरे को लेकर चिंतित है. ये इलाके Uganda और South Sudan के काफी करीब हैं. एजेंसी के मुताबिक, प्रभावित इलाकों और पड़ोसी देशों के बीच लोगों की भारी आवाजाही को देखते हुए, तेजी से क्षेत्रीय तालमेल बिठाना बेहद जरूरी है.
1976 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और सूडान में इस बीमारी की पहली बार पहचान होने के बाद से, DRC में इबोला के 17 मामले सामने आ चुके हैं. 2018 और 2020 के बीच पूर्वी कांगो में इबोला का प्रकोप सबसे जानलेवा था, जिसमें 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.
इबोला वायरस क्या है?
WHO के अनुसार, इबोला एक बहुत ज्यादा फैलने वाली और जानलेवा वायरल बीमारी है, जिसे इबोला हेमोरेजिक फीवर भी कहते हैं. यह एक वायरल इन्फेक्शन है जो खून की नसों को नुकसान पहुंचाता है. यह वायरस इन्फेक्टेड व्यक्ति के शरीर के फ्लूइड के संपर्क में आने से तेजी से फैलता है. इसके मुख्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, डायरिया और अंदरूनी या बाहरी ब्लीडिंग शामिल हैं. यह हवा से नहीं फैलता, बल्कि इन्फेक्टेड व्यक्ति के खून, लार, पसीने, उल्टी, यूरिन और स्पर्म के सीधे संपर्क में आने से फैलता है.
इबोला एक बहुत कम होने वाली बीमारी है. लेकिन 1976 में अफ्रीका (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में एक्सपर्ट्स द्वारा ऑर्थोइबोलावायरस (वह वायरस जिससे इबोला होता है) की पहचान होने के बाद से, इसके मामले रेगुलर तौर पर हो रहे हैं. इबोला का सबसे बड़ा आउटब्रेक 2013 और 2016 के बीच हुआ. दुनिया भर में कुल 28,652 मामले सामने आए और 10 देशों में 11,325 मौतें हुईं.
इबोला चार अलग-अलग तरह का होता है जो लोगों को प्रभावित करता है. एक्सपर्ट्स इबोला फैलाने वाले वायरस का नाम उस जगह के नाम पर रखते हैं जहां इसकी पहली बार पहचान हुई थी (हालांकि उसके बाद भी इसके दूसरे मामले सामने आए हैं). ये वायरस लक्षण पैदा करने की अपनी क्षमता और गंभीरता में अलग-अलग होते हैं. इनमें शामिल हैं.
यह मुख्य रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संपर्क के माध्यम से फैलता है. जब कोई व्यक्ति इबोला से गंभीर रूप से बीमार हो जाता है, तो उसके खांसने या छींकने के दौरान निकलने वाली भारी और गीली बूंदों (ड्रॉपलेट्स) में मौजूद वायरस, अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति के मुंह, नाक, आंख या शरीर के किसी खुले घाव (फटी हुई त्वचा) के संपर्क में आते हैं, तो इंफेक्शन का खतरा हो सकता है.

