चमोली: उत्तराखंड के चारधाम में से दो धाम यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुल चुके हैं. अब केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने बाकी हैं. इसी कड़ी में बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया के तहत आज भगवान बदरी विशाल की शीतकालीन पूजा स्थल नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) में विशेष पूजा अर्चना की गई.
इसके तहत भगवान नृसिंह, गरुड़, लक्ष्मी, गणेश, शंकराचार्य की प्राचीन और पवित्र गद्दी की पूजा संपन्न हुई. मंदिर प्रांगण में विधिवत पंच पूजा के बाद आदि गुरु शंकराचार्य की प्राचीन गद्दी और विष्णु वाहन भगवान गरुड़ की डोली, पवित्र गाडू घड़ा भू बैकुंठ बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हुई.आज यानी 21 अप्रैल को नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ से पूजा-अर्चना बाद आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र डोली एवं गरुड़ जी की उत्सव मूर्ति विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रावल अमरनाथ नंबूदरी समेत बदरी-केदार मंदिर समिति उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती की मौजूदगी में बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान हुई.
यह देव डोलियां पहले पड़ाव योग बदरी पांडुकेश्वर पहुंचेगी. जहां से बदरीनाथ धाम के लिए रवाना होंगी. इससे पहले बीते शनिवार को ज्योर्तिमठ में तिमुंडिया वीर पूजन और गरूड़ छाड़ मेले में आगामी बदरीनाथ यात्रा के सफल शुभारंभ के लिए आशीष मांगा गया था.बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बताया कि ज्योर्तिमठ के विभिन्न स्कूलों के छात्रों के साथ समारोह पूर्वक देव डोलियां बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान हुईं. इस दौरान स्कूली बच्चों ने दो किमी मार्ग तक देव डोलियों का पुष्प वर्षा से भव्य स्वागत किया.

